नील ()) आ+_अस+- दयशीत्याधिकशततमो<् ध्याय: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन धृतराष्ट्र रवाच एकवीरवधे मोघा शक्ति: सूतात्मजे यदा । कस्मात् सर्वान् समुत्सृज्य स तां पार्थे न मुक्तवान्,धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! कर्णके पास जो शक्ति थी, वह यदि एक ही वीरका वध करके निष्फल हो जानेवाली थी तो उसने सबको छोड़कर अर्जुनपर ही उसका प्रहार क्यों नहीं किया?
dhṛtarāṣṭra uvāca | ekavīra-vadhe moghā śaktiḥ sūtātmaje yadā | kasmāt sarvān samutsṛjya sa tāṃ pārthe na muktavān ||
धृतराष्ट्र ने कहा—संजय! यदि सूतपुत्र कर्ण के पास जो दिव्य शक्ति थी, वह एक ही वीर का वध करके निष्फल हो जानेवाली थी, तो उसने सबको छोड़कर पार्थ अर्जुन पर ही उसका प्रहार क्यों नहीं किया?
श्रीवायुदेव उवाच