स कर्ण त्वं समुत्सृज्य राक्षसेन्द्रमलायुधम् । जहि क्षिप्रं महाबाहो पश्चात् कर्ण वधिष्यसि,“महाबाहो! अतः तुम कर्णको छोड़कर पहले राक्षसराज अलायुधको शीघ्रतापूर्वक मार डालो। पीछे कर्णका वध करना”
sa karṇa tvaṃ samutsṛjya rākṣasendram alāyudham | jahi kṣipraṃ mahābāho paścāt karṇa vadhiṣyasi ||
“महाबाहो! तुम कर्ण को अभी छोड़कर पहले राक्षसराज अलायुध को शीघ्र मार डालो; उसके बाद कर्ण का वध करना।”
संजय उवाच