अग्रसत् सूतपुत्रस्य दिव्यान्यस्त्राणि मायया । उसने मायाद्वारा बहुत-से विकराल एवं अमंगल-सूचक मुख बनाकर सूतपुत्रके दिव्यास्त्रोंको अपना ग्रास बना लिया
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संजय बोले—उसने माया के द्वारा सूतपुत्र के दिव्य अस्त्रों को निगल लिया।
संजय उवाच