विससर्ज शरान् घोरान् सूतपुत्रं त आविशन् | उस मायाके नष्ट हो जानेपर घटोत्कचने अमर्षमें भरकर भयंकर बाण छोड़े, जो सूतपुत्रके शरीरमें समा गये ।। ततस्ते रुधिराभ्यक्ता भित्त्वा कर्ण महाहवे
sa f1jaya uv01ca |
visasarja 5bar01n ghor01n s6btaputra ta 01vi5ban |
atha m01y01y01 nae gate ghaotkaca am01re bharan bhayakar01n b0101n mumoca, ye s6btaputrasya 5bar2bre sam01vi5ban ||
tataste rudhir01bhyakt01 bhittv01 kara mah01have
उसने भयंकर बाण छोड़े, जो सूतपुत्र कर्ण के शरीर में धँस गए। फिर महायुद्ध में कर्ण को बेधकर वे बाण रक्त से लथपथ हो गए (आगे)।
संजय उवाच