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Shloka 396

पतन्त्यविरला: शूला: शतघ्न्य: पट्टिशास्तथा । लोहेके चक्र, भुशुण्डी, शक्ति, तोमर, शूल, शतघ्नी और पट्टिश आदि अस्त्र-शस्त्रोंकी अविरल धाराएँ गिर रही थीं

patanty aviralāḥ śūlāḥ śataghnyaḥ paṭṭiśās tathā |

संजय बोले—अविरल धाराओं में भारी अस्त्र-शस्त्र बरस रहे थे—शूल, शतघ्नी, पट्टिश, लोहे के चक्र, भुशुण्डी, शक्ति और तोमर। रणभूमि मानो निरन्तर लोहे की वर्षा से ढँक गई थी; उससे युद्ध का आतंक और धर्म-संकट और भी तीव्र हो उठा।

पतन्तिfall (are falling)
पतन्ति:
TypeVerb
Rootपत् (धातु)
Formलट् (वर्तमान), प्रथम, बहुवचन
अविरलाःunbroken, continuous
अविरलाः:
TypeAdjective
Rootअविरल (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, बहुवचन
शूलाःspears, pikes
शूलाः:
Karta
TypeNoun
Rootशूल (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, बहुवचन
शतघ्न्यःsataghnis (missile/weapon, lit. 'hundred-slayer')
शतघ्न्यः:
Karta
TypeNoun
Rootशतघ्नी (प्रातिपदिक)
Formस्त्रीलिङ्ग, प्रथमा, बहुवचन
पट्टिशाःbattle-axes / hatchets
पट्टिशाः:
Karta
TypeNoun
Rootपट्टिश (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, प्रथमा, बहुवचन
तथाand also, likewise
तथा:
TypeIndeclinable
Rootतथा (अव्यय)

संजय उवाच

S
Sañjaya
Ś
śūla (spear)
Ś
śataghnī
P
paṭṭiśa