पतन्त्यविरला: शूला: शतघ्न्य: पट्टिशास्तथा । लोहेके चक्र, भुशुण्डी, शक्ति, तोमर, शूल, शतघ्नी और पट्टिश आदि अस्त्र-शस्त्रोंकी अविरल धाराएँ गिर रही थीं
patanty aviralāḥ śūlāḥ śataghnyaḥ paṭṭiśās tathā |
संजय बोले—अविरल धाराओं में भारी अस्त्र-शस्त्र बरस रहे थे—शूल, शतघ्नी, पट्टिश, लोहे के चक्र, भुशुण्डी, शक्ति और तोमर। रणभूमि मानो निरन्तर लोहे की वर्षा से ढँक गई थी; उससे युद्ध का आतंक और धर्म-संकट और भी तीव्र हो उठा।
संजय उवाच