विपुलाभि: सटाभिस्ते ह्लेषमाणा मुहुर्मुहु: । उन घोड़ोंके कंधोंपर लंबे-लंबे बाल थे। वे परिश्रमको जीत चुके थे। वे सभी अपने विशाल केसरों (गर्दनके लंबे बालों)-से सुशोभित थे और उस भयानक राक्षसका भार वहन करते हुए वे बारंबार हिनहिना रहे थे
vipulābhiḥ saṭābhis te hleṣamāṇā muhur muhuḥ |
वे घोड़े विपुल सटाओं से सुशोभित थे और बारंबार हिनहिनाते थे। उनके कंधों पर लंबे-लंबे बाल थे और विशाल केसरों से वे शोभित थे। परिश्रम को जीत चुके वे सब उस भयानक राक्षस का भार वहन करते हुए फिर-फिर हिनहिनाते रहे।
संजय उवाच