निहन्यमानेष्वस्त्रेषु मायया तेन रक्षसा । असम्भ्रान्तस्तदा कर्णस्तदू रक्ष: प्रत्ययुध्यत,उस राक्षसके द्वारा मायासे अपने अस्त्रोंके नष्ट हो जानेपर भी उस समय कर्णके मनमें तनिक भी घबराहट नहीं हुई। वह उस राक्षसके साथ युद्ध करता ही रहा
nihanyamāneṣv astreṣu māyayā tena rakṣasā | asambhrāntas tadā karṇas tadū rakṣaḥ pratyayudhyat ||
उस राक्षस के द्वारा माया से अपने अस्त्रों के नष्ट हो जाने पर भी उस समय कर्ण के मन में तनिक भी घबराहट नहीं हुई; वह उस राक्षस के साथ युद्ध करता ही रहा।
संजय उवाच