नारायणास्त्र-शमनं द्रौणि-प्रहारश्च
Pacification of the Nārāyaṇāstra and Drauni’s Renewed Assault
तस्य तद्ू वचन श्रुत्वा माद्रीपुत्रस्थ सारथि: । प्रायात् तेन तदा राजन् यत्र द्रोणो व्यवस्थित:,राजन! माद्रीकुमारका वह वचन सुनकर सारथि उस रथके द्वारा जहाँ द्रोणाचार्य खड़े थे, वहाँ तत्काल जा पहुँचा
tasya tad vacanaṁ śrutvā mādrīputrastha sārathiḥ | prāyāt tena tadā rājan yatra droṇo vyavasthitaḥ ||
राजन्! माद्रीपुत्र के वे वचन सुनकर उसका सारथी उसी रथ को तुरंत वहाँ ले गया जहाँ द्रोणाचार्य युद्ध-व्यवस्था में स्थित थे।
संजय उवाच