द्रौणिप्रतिज्ञा–नारायणास्त्रवर्णनम्
Drauṇi’s Vow and the Description of the Nārāyaṇāstra
शतानीको<थ संक्रुद्धश्चित्रसेनस्थ मारिष । जघान चतुरो वाहान् सारथिं च नरोत्तम:,माननीय नरेश! तब अत्यन्त कुपित हुए नरश्रेष्ठ शतानीकने चित्रसेनके चारों घोड़ों और सारथिको मार डाला
śatānīko ’tha saṅkruddhaś citrasenastha māriṣa | jaghāna caturo vāhān sārathiṃ ca narottamaḥ ||
तब अत्यन्त क्रुद्ध नरश्रेष्ठ शतानीक ने चित्रसेन के चारों घोड़ों को और उसके सारथि को भी मार गिराया।
संजय उवाच