द्रोणनिन्दाश्रवणं तथा सात्यकि–पार्षतविवादः
Hearing the reproach of Droṇa and the Sātyaki–Pārṣata dispute
रौद्रेण चित्रपक्षेण विवृताक्षेण कूजता । ध्वजेनोच्छितदण्डेन गृध्रराजेन राजता
raudreṇa citrapakṣeṇa vivṛtākṣeṇa kūjatā | dhvajenocchitadaṇḍena gṛdhrarājena rājatā
संजय बोले—ऊँचे दण्ड पर उठे ध्वज से वह रथ शोभित था, जिस पर क्रोधपूर्ण, चित्र-वर्ण पंखों वाला, फैली आँखों से कूजता हुआ गृध्रराज विराजमान था।
संजय उवाच