दुर्योधन–द्रोणसंवादः
Arjuna-vīrya-prasaṃśā and renewed battle formation
ब्रह्मण्य: सत्यवाग दान्तो गुरुदैवतपूजक: । नित्यं धर्मरतश्नैव कृतास्त्रश्न विशेषत:
brahmaṇyaḥ satyavāg dānto gurudaivatapūjakaḥ | nityaṃ dharmarataś caiva kṛtāstraś ca viśeṣataḥ ||
कृपाचार्य बोले—वह ब्राह्मणों और धर्म का भक्त है, वाणी का सत्यवादी, इन्द्रिय-निग्रही और गुरु को देवतुल्य पूजने वाला है। वह सदा धर्म में रत रहता है और विशेषतः शस्त्रविद्या में पूर्ण निपुण है।
कृप उवाच