अमोघशक्तिव्यंसनप्रश्नः — Why Karṇa’s Śakti Was Not Used on Arjuna
संजय! तुम पाण्डवोंको तो हर्ष और उत्साहसे युक्त, आगे बढ़नेवाले और संतुष्ट बताते हो और मेरे सैनिकोंको दुःखी एवं युद्धसे विमुख बताया करते हो ।। कथमेषां तदा तत्र पार्थानामपलायिनाम् | प्रकाशमभवद्ू रात्रौ कथं कुरुषु संजय,सूत! युद्धसे पीछे न हटनेवाले इन कुन्तीकुमारोंके दलमें रातके समय कैसे प्रकाश हुआ और कौरवदलमें भी किस प्रकार उजाला सम्भव हुआ?
dhṛtarāṣṭra uvāca |
sañjaya! tvaṃ pāṇḍavān tu harṣotsāhayuktān abhyudyatān saṃtuṣṭān ca vadāsi, mama sainyān tu duḥkhitān yuddhavimukhān ca varṇayasi ||
katham eṣāṃ tadā tatra pārthānām apalāyinām |
prakāśam abhavad rātrau kathaṃ kuruṣu sañjaya, sūta! ||
धृतराष्ट्र बोले— संजय! तुम पाण्डवों को हर्ष और उत्साह से युक्त, आगे बढ़ने वाले और संतुष्ट बताते हो तथा मेरे सैनिकों को दुःखी और युद्ध से विमुख कहते हो। फिर उस समय वहाँ युद्ध से न हटने वाले उन पार्थों के दल में रात के भीतर प्रकाश कैसे हुआ? और हे सूतनन्दन संजय! कौरवों में भी उजाला कैसे सम्भव हुआ?
धृतराष्ट उवाच