उपायैः पूर्ववधकथनम् / Strategic Justifications for Prior Eliminations
वादित्रघोषस्तनितां चापविद्युद्ध्वजैर्व॒ताम् । द्रोणपाण्डवपर्जन्यां खड्गशक्तिगदाशनिम्
vāditraghoṣa-stanitāṁ cāpa-vidyud-dhvajair vṛtām | droṇa-pāṇḍava-parjanyāṁ khaḍga-śakti-gadā-śanim ||
संजय बोले—रणवाद्यों के घोष से वह गड़गड़ाहट-सी हो रही थी और खिंचे धनुषों से उठे ध्वज बिजली-से चमक रहे थे; द्रोण और पाण्डवों के बीच उठी वह युद्ध-घटा पर्जन्य-सी थी, जिसके वज्रपात खड्ग, शक्ति और गदा थे।
संजय उवाच