धृतराष्ट्र–संजय संवादः: कर्ण–घटोत्कचयोर्निशायुद्धवर्णनम्
Dhṛtarāṣṭra–Sañjaya Dialogue: Description of the Night Engagement of Karṇa and Ghaṭotkaca
नच त्वां परुषं किंचिदुक्तवान् पाण्डुनन्दन:,तस्मादस्यावलेपस्य सद्यः फलमवाप्रुहि । 'परंतु उन पाण्डुनन्दन भीमने तुझसे कोई कटु वचन नहीं कहा। तूने जो भीमको बहुत- सी रूखी बातें सुनायी हैं और मेरे परोक्षमें तुमलोगोंने जो मेरे पुत्र सुभद्राकुमार अभिमन्युको अन्यायपूर्वक मार डाला है, अपने उस घमंडका तत्काल ही उचित फल तू प्राप्त कर ले
na ca tvāṃ paruṣaṃ kiñcid uktavān pāṇḍunandanaḥ, tasmād asyāvalepasya sadyaḥ phalam avāpruhi |
संजय ने कहा—पाण्डुनन्दन ने तुझसे कोई कटु वचन नहीं कहा है। इसलिए अपने इस अहंकार का उचित फल तू तत्काल प्राप्त कर।
संजय उवाच