द्रोणपर्व — पञ्चदशोऽध्यायः (Droṇa Parva, Chapter 15): युधिष्ठिर-रक्षा तथा अर्जुनस्य शरवृष्टिः
तथा भीमगदावेगैस्ताड्यमानो महाबल: । धैर्यान्मद्राधिपस्तस्थौ वजैर्गिरिरिवाहत:,इसी प्रकार भीमसेनकी गदाके वेगसे आहत होकर महाबली मद्रराज वज्राघातसे पीड़ित पर्वतकी भाँति धैर्यपूर्वक खड़े रहे
tathā bhīmagadāvegais tāḍyamāno mahābalaḥ | dhairyān madrādhipas tasthau vajrair girir ivāhataḥ ||
उसी प्रकार भीमसेन की गदा के वेग से आहत होकर महाबली मद्रराज धैर्यपूर्वक अडिग खड़े रहे, जैसे वज्राघात से पीड़ित पर्वत स्थिर रहता है।
संजय उवाच