अध्याय १४८ — कर्णप्रभावः, धृष्टद्युम्नस्य विरथता, तथा घटोत्कच-आह्वानम्
Chapter 148: Karṇa’s Pressure, Dhṛṣṭadyumna Unhorsed, and the Summoning of Ghaṭotkaca
युगपद् दिक्षु सर्वासु सर्वाण्यस्त्राणि दर्शयन् | उस रणक्षेत्रमें कुन्तीकुमार अर्जुन एक साथ सम्पूर्ण दिशाओंमें देखते और सब प्रकारके अस्त्रोंका कौशल दिखाते हुए विचर रहे थे,चित्रध्वजपताकादूयां छत्रचापोर्मिमालिनीम् | विगतासुमहाकायां गजदेहाभिसंकुलाम्
उस रणक्षेत्र में कुन्तीकुमार अर्जुन एक साथ सब दिशाओं में देखते हुए और सब प्रकार के अस्त्रों का कौशल दिखाते हुए विचर रहे थे—वह भूमि चित्र-विचित्र ध्वज-पताकाओं, धुएँ, छत्रों और धनुषों की तरंगों से मानो भर उठी थी; वहाँ विशाल-विशाल गज-देहों के समान पड़े हुए मृत शरीरों का ढेर लगा था।
संजय उवाच