Adhyāya 141 — Night duels: Śaineya and Bhūriśravas; Droṇi and Ghaṭotkaca; Bhīma and Duryodhana
भीमो5पि मुष्टिमुद्यम्य वज्गर्भा सुदारुणाम् । हन्तुमैच्छत् सूतपुत्रं संस्मरन्नर्जुनं क्षणात्,अब भीमसेनने अपने अंगूठेको मुट्टीके भीतर करके वज्रतुल्य अत्यन्त भयंकर घूँसा तानकर सूतपुत्र कर्णको मार डालनेकी इच्छा की। तबतक क्षणभरमें उन्हें अर्जुनकी याद आ गयी। अतः सव्यसाची अर्जुनने पहले जो प्रतिज्ञा की थी, उसकी रक्षा करते हुए पाण्डुनन्दन भीमने समर्थ एवं शक्तिशाली होनेपर भी उस समय कर्णका वध नहीं किया
bhīmo 'pi muṣṭim udyamya vajragarbhāṁ sudāruṇām | hantum aicchat sūtaputraṁ saṁsmarann arjunaṁ kṣaṇāt ||
संजय बोले—भीम ने भी अंगूठा मुट्ठी में दबाकर वज्रतुल्य अत्यन्त भयंकर घूँसा उठाया और सूतपुत्र कर्ण को मार डालने की इच्छा की; पर उसी क्षण उन्हें अर्जुन का स्मरण हो आया। इसलिए सव्यसाची अर्जुन की पूर्व प्रतिज्ञा की रक्षा करते हुए, समर्थ और बलवान होकर भी, उस समय भीम ने कर्ण का वध नहीं किया।
संजय उवाच