Adhyāya 141 — Night duels: Śaineya and Bhūriśravas; Droṇi and Ghaṭotkaca; Bhīma and Duryodhana
एवं तं॑ विरथं कृत्वा कर्णो राजन् व्यकत्थयत्,प्राहिणोत् सूतपुत्राय केशवेन प्रचोदित: । राजन्! इस प्रकार कर्णने भीमसेनको रथहीन करके जब वृष्णिवंशके सिंह भगवान् श्रीकृष्ण और महामना अर्जुनके सामने ही अपनी इतनी प्रशंसा की, तब श्रीकृष्णकी प्रेरणासे कपिध्वज अर्जुनने शिलापर स्वच्छ किये हुए बहुत-से बाणोंको सूतपुत्र कर्णपर चलाया
sañjaya uvāca |
evaṁ taṁ virathaṁ kṛtvā karṇo rājan vyakatthayat |
prāhiṇot sūtaputrāya keśavena pracoditaḥ ||
संजय बोले—राजन्! इस प्रकार भीमसेन को रथहीन करके कर्ण ने केशव और अर्जुन के सामने खुलकर अपनी बड़ाई की। तब श्रीकृष्ण की प्रेरणा से कपिध्वज अर्जुन ने शिलापर स्वच्छ किए हुए बहुत-से तीक्ष्ण बाण सूतपुत्र कर्ण पर चला दिए।
संजय उवाच