हताश्चात् सरथाद् राजन् गृह चर्म महाबल: । अभ्यायाद् भीमसेन तु मत्तो मत्तमिव द्विपम्,राजन! घोड़ोंके मारे जानेपर महाबली विविंशति ढाल और तलवार लिये रथसे कूद पड़ा और जैसे एक मतवाला हाथी दूसरे मदोन्मत्त गजराजपर आक्रमण करता है, उसी प्रकार उसने भीमसेनपर चढ़ाई की
संजय बोले—राजन्! घोड़े मारे जाने पर महाबली विविंशति ढाल और तलवार लेकर रथ से कूद पड़ा और जैसे मतवाला हाथी दूसरे मदोन्मत्त गजराज पर चढ़ दौड़ता है, वैसे ही वह भीमसेन पर टूट पड़ा।
संजय उवाच