रात्रौ युद्धप्रवृत्तिः — Night Battle Begins; Duryodhana’s Protective Orders for Droṇa
Droṇa-parva 139
त्वया वृद्धेन धीरेण कार्यतत्त्वार्थदर्शिना । न कृतं सुह्ृदां वाक््यं दैवमत्र परायणम्,आप वृद्ध हैं, धीर हैं, कार्यके तत्त्व और प्रयोजनको देखते और समझते हैं, तो भी आपने हितैषी सुहृदोंकी बातें नहीं मानीं। इसमें दैव ही प्रधान कारण है
tvayā vṛddhena dhīreṇa kāryatattvārthadarśinā | na kṛtaṃ suhṛdāṃ vākyaṃ daivam atra parāyaṇam ||
आप वृद्ध हैं, धीर हैं, कार्य के तत्त्व और प्रयोजन को भलीभाँति देखने-समझने वाले हैं; फिर भी आपने हितैषी सुहृदों की बात नहीं मानी। इस विषय में दैव ही परम आश्रय और प्रधान कारण बन गया है।
संजय उवाच