रात्रौ युद्धप्रवृत्तिः — Night Battle Begins; Duryodhana’s Protective Orders for Droṇa
Droṇa-parva 139
पतिमन्यं वृणीष्वेति तस्येदं फलमागतम् । द्यूतके समय कर्णके साथ आपके मन्दमति पुत्र दुर्बुद्धि दुर्योधनने पांचालराजकुमारी द्रौपदीको सभामें बुलाकर उसके प्रति जो दुर्वचन कहा था तथा प्रजानाथ! महाराज! पाण्डवों और आपके सामने समस्त कौरवोंके सुनते हुए कर्णने सभामें द्रौपदीके प्रति जो यह कठोर वचन कहा था कि “कृष्णे! पाण्डव नष्ट हो गये। सदाके लिये नरकमें पड़ गये। तू दूसरा पति कर ले", उसी अन्यायका आज यह फल प्राप्त हुआ है
patim anyaṁ vṛṇīṣveti tasyedaṁ phalam āgatam | dyūtake samaye karṇena saha āpake mandamati putra durbuddhi duryodhanena pāñcālarājakumārī draupadī sabhāṁ nītvā tasyai prati yad durvacanaṁ uktaṁ tathā prajānātha mahārāja pāṇḍavaiś ca tvayā ca samakṣaṁ sarvakauravaśravaṇe karṇena sabhāyāṁ draupadīṁ prati yat kaṭhoraṁ vacanaṁ uktaṁ—“kṛṣṇe! pāṇḍavā naṣṭāḥ, sadā-kṛte narake patitāḥ; tvaṁ dvitīyaṁ patiṁ kuru”—tasyaiva anyāyasya adya idaṁ phalaṁ prāptam iti |
“दूसरा पति चुन ले”—उस अन्याय का यही फल आज आ पहुँचा है। द्यूत-क्रीड़ा के समय तुम्हारे मंदबुद्धि, दुर्बुद्धि पुत्र दुर्योधन ने पाञ्चालराजकुमारी द्रौपदी को सभा में बुलाकर उसके प्रति दुर्वचन कहे; और हे प्रजानाथ, हे महाराज! पाण्डवों और तुम्हारे सामने, समस्त कौरवों के सुनते हुए, कर्ण ने भी सभा में द्रौपदी से कठोर वचन कहा—“कृष्णे! पाण्डव नष्ट हो गए, सदा के लिए नरक में पड़े; तू दूसरा पति कर ले।” उसी अधर्म का फल आज लौटकर उन पर आ गया है।
संजय उवाच