Somadatta’s Kṣātra-Dharma Accusation; Night Combat, Māyā, and the Fall of Ghaṭotkaca
Droṇa-parva, Adhyāya 131
गाज्डीवं व्याक्षिपत् पार्थ: कृष्णो5प्यन्जमवादयत् । तमन्तर्धाय निनदं भीमस्य नदतो ध्वनि: । अश्रूयत तदा राजन सर्वसैन्येषु दारुण:,इसी समय अर्जुनने गाण्डीव धनुषकी टंकार की और भगवान् श्रीकृष्णने पांचजन्य शंख बजाया। परंतु उसकी ध्वनिको तिरोहित करके गरजते हुए भीमसेनका भयंकर सिंहनाद सम्पूर्ण सेनाओंमें सुनायी देने लगा
sañjaya uvāca |
gāṇḍīvaṃ vyākṣipat pārthaḥ kṛṣṇo 'py añjam avādayat |
tam antardhāya ninadaṃ bhīmasya nadato dhvaniḥ |
aśrūyata tadā rājan sarvasainyeṣu dāruṇaḥ ||
संजय बोले—पार्थ अर्जुन ने गाण्डीव की टंकार की और श्रीकृष्ण ने भी तत्क्षण पाञ्चजन्य शंख बजाया। पर उन दोनों ध्वनियों को दबाकर, सिंह-गर्जना के समान भीमसेन का भयंकर नाद, हे राजन्, उस समय समस्त सेनाओं में सुनाई देने लगा।
संजय उवाच