Droṇa-parva Adhyāya 125: Duryodhana’s despair and vow after Jayadratha’s fall (जयद्रथवधे दुर्योधनविलापः)
तेषु द्रवत्सु राजेन्द्र पुत्रो द:ःशासनस्तव | तस्थौ व्यपेतभी राजन् सात्यकिं चार्दयच्छरै:,राजेन्द्र! उनके भागनेपर भी आपका पुत्र दुःशासन वहीं निर्भय खड़ा रहा। उसने सात्यकिको अपने बाणोंसे पीड़ित कर दिया
teṣu dravatsu rājendra putro duḥśāsanas tava | tasthau vyapetabhī rājann sātyakiṃ cārdayac charaiḥ ||
राजेन्द्र! उनके भागने पर भी आपका पुत्र दुःशासन वहीं निर्भय खड़ा रहा। राजन्, उसने बाणों की वर्षा से सात्यकि को पीड़ित कर दिया।
संजय उवाच