नानादेशसमुत्थांश्व नानाजातींश्व दन्तिन: । निजघ्ने तत्र शैनेय: शतशो5थ सहस्रश:,शिनिके उस वीर पौत्रने अनेक देशोंमें उत्पन्न हुए विभिन्न जातिके सैकड़ों और हजारों हाथियोंका भी संहार कर डाला
nānādeśasamutthāṁś ca nānājātīṁś ca dantinaḥ | nijaghne tatra śaineyaḥ śataśo ’tha sahasraśaḥ ||
संजय बोले—वहाँ शिनि के उस वीर पौत्र शैनेय (सात्यकि) ने अनेक देशों में उत्पन्न, विभिन्न जाति के सैकड़ों और हजारों हाथियों का संहार कर डाला।
संजय उवाच