अर्जुनस्य गुरुधर्मविलापः तथा शैनेयकर्णयोर्युद्धारम्भः | Arjuna’s Lament on Guru-Dharma and the Opening of the Sātyaki–Karṇa Duel
अथान्यद् धनुरादाय श्यालस्तव विशाम्पते,प्रजानाथ! तत्पश्चात् आपके सालेने दूसरा धनुष लेकर सात्यकिको पहले आठ बाण मारे। फिर पाँच बाणोंसे उन्हें घायल कर दिया। दुःशासनने दस और दुःसहने भी तीन बाण मारे
atha anyad dhanur ādāya śyālas tava viśāmpate prajānātha | tatpaścāt śyālena dvitīyaṃ dhanur gṛhītvā sātyakiṃ pūrvam aṣṭabhir bāṇaiḥ tāḍitaḥ | tataḥ pañcabhir bāṇaiḥ sa viddhaḥ | duḥśāsanena daśa bāṇāḥ, duḥsahena ca trayo bāṇāḥ prahṛtāḥ |
संजय बोले—तत्पश्चात्, हे प्रजानाथ! हे विशाम्पते! आपके साले ने दूसरा धनुष उठाया। उससे उसने पहले सात्यकि को आठ बाण मारे, फिर पाँच बाणों से उन्हें घायल किया। दुःशासन ने दस और दुःसह ने तीन बाण चलाए। इस प्रकार कौरवों ने मिलकर बाण-वर्षा से सात्यकि को दबाने का प्रयत्न किया।
संजय उवाच