धृतराष्ट्र-संजय-संवादः — सात्यकि-अलम्बुसयोर्युद्धवर्णनम्
Dhṛtarāṣṭra–Saṃjaya Dialogue; Account of Sātyaki vs Alambusa
अन्योन्यं समुपाश्रित्य न त्यक्ष्यन्ति रणाजिरम् | एतदन्तरमासाद्य चोदयाश्चान् प्रहष्टयत्,“ये सब-की-सब एक-दूसरीका सहारा लेकर युद्धके लिये डटी हुई हैं। ये कभी भी समरांगणका परित्याग नहीं करेंगी। तुम इन्हींके बीचमें होकर प्रसन्नतापूर्वक अपने घोड़ोंको आगे बढ़ाओ
ये सब-की-सब एक-दूसरे का सहारा लेकर रण के लिए डटी हैं; ये कभी भी रणभूमि का परित्याग नहीं करेंगी। तुम इन्हीं के बीच से होकर, हर्षपूर्वक घोड़ों को आगे बढ़ाओ।
संजय उवाच