द्रोणपर्व (अध्याय ११२) — कर्णभीमयोर्युद्धम्, दुर्योधनस्य रक्षणादेशः
Droṇa-parva 112: Karṇa–Bhīma Engagement and Duryodhana’s Protective Order
सत्यमेतन्मयोक्तं ते याहि यत्र धनंजय: । तुम्हारा वहाँ जाना भगवान् श्रीकृष्णको, मुझको तथा अर्जुनको भी प्रिय है। यह मैंने तुमसे सच्ची बात कही है। अत: जहाँ अर्जुन है, वहाँ जाओ
satyam etan mayoktaṁ te yāhi yatra dhanañjayaḥ |
युधिष्ठिर बोले— यह सत्य है जो मैंने तुमसे कहा है। जहाँ धनंजय (अर्जुन) हैं, वहाँ जाओ। तुम्हारा वहाँ जाना भगवान श्रीकृष्ण को, मुझे और अर्जुन को भी प्रिय है। मैंने तुमसे सच्ची बात कही है; इसलिए जहाँ अर्जुन हैं, वहीं जाओ।
युधिष्ठिर उवाच