Droṇa-parva Adhyāya 107: Karṇa–Bhīma Saṃmarda
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दुर्योधनमुखानां च पाण्डूनामृषभस्य च । उस समय एक-दूसरेको लक्ष्य करके गर्जना करनेवाले दुर्योधन आदि महारथियों तथा पाण्डवश्रेष्ठ अर्जुनमें परस्पर आघात-प्रतिघात होने लगा ।। ३३ $ ।। तत्राद्भुतं परं चक्रे कौन्तेयः कृष्णसारथि:
duryodhana-mukhānāṁ ca pāṇḍūnām ṛṣabhasya ca | tatra adbhutaṁ paraṁ cakre kaunteyaḥ kṛṣṇa-sārathiḥ ||
संजय बोला—दुर्योधन आदि अग्रणी महारथियों और पाण्डवों के वृषभ अर्जुन में, एक-दूसरे को लक्ष्य करके गर्जना करते हुए, परस्पर आघात-प्रतिघात होने लगा। तभी कृष्ण को सारथि बनाए कौन्तेय ने वहाँ एक अद्भुत और परम पराक्रम कर दिखाया।
संजय उवाच