भीमकर्णसमागमः | Bhīma–Karṇa Encounter
तदस्य क्षत्रियास्तत्र सर्व एवाभ्यपूजयन् । यदर्जुनहृषीकेशौ प्रत्युद्याती न््यवारयत्,अपने सामने आये हुए श्रीकृष्ण और अर्जुनको दुर्योधनने जो रोक दिया, उसके इस कार्यकी वहाँ सभी क्षत्रियोंने भूरि-भूरि प्रशंसा की
sañjaya uvāca | tad asya kṣatriyās tatra sarva evābhyapūjayan | yad arjuna-hṛṣīkeśau pratyudyātīn nyavārayat ||
वहाँ सभी क्षत्रियों ने उसके इस कर्म की भूरि-भूरि प्रशंसा की—क्योंकि सामने बढ़ते हुए अर्जुन और हृषीकेश (श्रीकृष्ण) को उसने रोक दिया।
संजय उवाच