संशयं परम॑ प्राप्त मज्जन्तं व्यसनार्णवे । क्रोधमें भरे हुए इन समस्त योद्धाओंको वेगपूर्वक धावा करते देख द्रोणाचार्यने आपके महारथियोंसे कहा--“वीरो! तुम्हारा कल्याण हो। शीघ्र जाओ और संकटके समुद्रमें डूबकर महान् प्राणसंशयमें पड़े हुए राजा दुर्योधनकी रक्षा करो
क्रोध से भरे हुए उन सब योद्धाओं को वेगपूर्वक धावा करते देखकर द्रोणाचार्य ने आपके महारथियों से कहा—“वीरो! तुम्हारा कल्याण हो। शीघ्र जाओ और संकट के समुद्र में डूबकर प्राण-संशय में पड़े हुए राजा दुर्योधन की रक्षा करो।”
संजय उवाच