भीष्मशिबिरगमनम् — Duryodhana’s Visit to Bhīṣma’s Camp and the Command Appeal
भार्यार्थ तां च जग्राह पार्थ: कामवशानुगाम् । एवमेष समुत्पन्न: परपक्षे&र्जुनात्मज:
sañjaya uvāca |
bhāryārthaṃ tāṃ ca jagrāha pārthaḥ kāmavaśānugām |
evam eṣa samutpannaḥ parapakṣe 'rjunātmajaḥ ||
संजय बोले—पत्नी रूप में ग्रहण करने के लिए पार्थ (अर्जुन) ने उस नागकन्या को स्वीकार किया, जो काम के वश में आ गई थी। इसी प्रकार अर्जुन का यह पुत्र उत्पन्न हुआ, जो अब परपक्ष में खड़ा है।
संजय उवाच