अध्याय ८८ — घटोत्कच-दुर्योधनयुद्धवर्णनम्
Ghaṭotkaca–Duryodhana Engagement
अज्ञायमाने च धनंजयेडपि महाहवे सम्प्रसक्ते नृवीरे । कथं हि भीष्मात् प्रथित: पृथिव्यां भयं त्वमद्य प्रकरोषि वीर
वीर! नरवीर अर्जुन कहीं महायुद्ध में फँसे हुए हैं; उनका इस समय पता नहीं है। ऐसे समय में तुम, जो पृथ्वी पर विख्यात वीर हो, आज भीष्म से भय कैसे कर रहे हो?
संजय उवाच