महाव्यूहप्रवर्तनम् / Deployment of the Great Battle Arrays
परेण यत्नेन विगाहा सेनां सर्वात्मनाहं तव राजपुत्र । इच्छामि दातुं विजयं सुखं च न चात्मानं छादये<हं त्वदर्थे,“राजकुमार! मैं अपनी पूरी शक्ति लगाकर महान प्रयत्नके साथ पाण्डवोंकी सेनामें प्रवेश करके तुम्हें विजय और सुख देना चाहता हूँ। तुम्हारे लिये अपने-आपको छिपाकर नहीं रखता हूँ
pareṇa yatnena vigāhya senāṁ sarvātmanāhaṁ tava rājaputra | icchāmi dātuṁ vijayaṁ sukhaṁ ca na cātmānaṁ chādaye ’haṁ tvadarthe ||
राजकुमार! मैं परम प्रयत्न करके, अपने सम्पूर्ण सामर्थ्य से शत्रु-सेना में घुसकर तुम्हें विजय और सुख देना चाहता हूँ; तुम्हारे लिए मैं अपने-आपको रोकता या छिपाता नहीं हूँ।
संजय उवाच