भीष्मस्य भीमसेन-निरोधः
Bhīṣma checks Bhīmasena; matched engagements intensify
तत्रासुरवधं कृत्वा सर्वलोकसुखाय वै । धर्म प्राप्प यश: प्राप्य योगं प्राप्स्पसि तत्त्वत:,वहाँ सब लोगोंके सुखके लिये असुरोंका वध करके धर्म और यशका विस्तार कीजिये। अन्तमें अवतारका उद्देश्य पूर्ण करके आप पुनः अपने पारमार्थिक स्वरूपसे संयुक्त हो जायूँगे
भीष्म बोले— वहाँ समस्त लोकों के सुख के लिए असुरों का वध करके धर्म की वृद्धि कीजिए और यश प्राप्त कीजिए। फिर तत्त्वतः योग को प्राप्त करके—अर्थात् अवतार-कार्य पूर्ण कर—आप अपने परम स्वरूप से पुनः संयुक्त हो जाइए।
भीष्म उवाच