Vāsudeva-Māhātmya: Duryodhana’s Inquiry and Bhīṣma’s Theological Account of Keśava
शुशुभाते नरव्याप्रौ तौ भीष्मशरविक्षतौ । गोवृषाविव संरब्धौ विषाणैलिखिताड्कितौ
संजय बोले— भीष्म के बाणों से क्षत-विक्षत वे दोनों नरश्रेष्ठ—श्रीकृष्ण और अर्जुन—क्रोध से भरे हुए उन दो साँड़ों के समान सुशोभित हो रहे थे, जिनके शरीर पर सींगों के आघात से बहुत-से घाव बन गये हों।
संजय उवाच