भीष्मपर्व — अध्याय 54: फल्गुन-प्रतिरोधः, सौबली-व्यूह-विध्वंसः, दुर्योधन-भीष्म-संवादः
क्षपयिष्यति सेनां मे कृष्ण भीष्मो महास्त्रवित्
हे कृष्ण! महास्त्रों के ज्ञाता भीष्म मेरी सारी सेना का क्षय कर डालेंगे। जैसे पतंगे मरने के लिए ही जलती आग में कूद पड़ते हैं, वैसे ही मेरे सब सैनिक अपने विनाश के लिए भीष्म के समीप जा रहे हैं।
संजय उवाच