भूमिगुण-प्रश्नः
Inquiry into the qualities of Earth and the classification of beings
आनुपूर्व्या विनश्यन्ति जायन्ते चानुपूर्वश: । सर्वाण्यपरिमेयाणि तदेषां रूपमैश्वरम्
वे सब भूत क्रमशः नष्ट होते हैं और क्रमशः ही उत्पन्न होते हैं। वे सब अपरिमेय हैं; उनका यह रूप ईश्वर-प्रदत्त है।
संजय उवाच