चेदिराजस्तु संक्रुद्धो बाह्लीकं नवभि: शरै: | विव्याध समरे तूर्ण मत्तो मत्तमिव द्विपम्,तब चेदिराज धृष्टकेतुने अत्यन्त क्रुद्ध होकर जैसे मतवाला हाथी किसी मदोन्मत्त गजराजपर हमला करता है, उसी प्रकार तुरंत ही नौ बाण मारकर उस युद्धभूमिमें बाह्नलीकको क्षत-विक्षत कर दिया
तब चेदिराज धृष्टकेतु अत्यन्त क्रुद्ध होकर, जैसे मतवाला हाथी मदोन्मत्त गजराज पर झपटता है, वैसे ही समर में तुरंत नौ बाणों से बाह्लीक को बेध डाला।
संजय उवाच