Nirmaryāda-saṃgrāma-varṇana — The Unbounded Clash and Bhīṣma’s Rallying Presence
अनेकचित्तविभ्रान्ता मोहजालसमावृता: । प्रसक्ता: कामभोगेषु पतन्ति नरके5शुचौ
अनेक प्रकार के विचारों से भ्रमित, मोह के जाल से आच्छादित और काम-भोगों में आसक्त होकर वे अपवित्र नरक में गिरते हैं।
अजुन उवाच