Śraddhā–Guṇa–Vibhāga Yoga (Faith and the Three Guṇas) — Mahābhārata Book 6, Chapter 39
इति क्षेत्र तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्ते समासत: । मद्धभधक्त एतद् विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते,इस प्रकार क्षेत्र तथा ज्ञान और जाननेयोग्य परमात्मा-का स्वरूप संक्षेपसे कहा गया*। मेरा भक्त इसको तत्त्वसे जानकर मेरे स्वरूपको प्राप्त होता है?
iti kṣetraṃ tathā jñānaṃ jñeyaṃ coktaṃ samāsataḥ | mad-bhakta etad vijñāya mad-bhāvāyopapadyate ||
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और जानने योग्य परम तत्त्व का स्वरूप संक्षेप में कहा गया। मेरा भक्त इसे तत्त्व से जानकर मेरे ही भाव—मेरे स्वरूप—को प्राप्त होता है।
अजुन उवाच