उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
ध्यायन्त: प्रकिरन्तश्न व्याला वेपथुसंयुता: । दीनास्तुरड्रमा: सर्वे वारणा: सलिलाश्रया:,दुष्ट हाथी काँपते और चिन्ता करते हुए भयके मारे मल-मूत्र त्याग कर रहे हैं, घोड़े अत्यन्त दीन हो रहे हैं और सम्पूर्ण गजराज पसीने-पसीने हो रहे हैं
dhyāyantaḥ prakirantaś ca vyālā vepathusaṁyutāḥ | dīnāś turagamāḥ sarve vāraṇāḥ salilāśrayāḥ ||
व्यास बोले—पशु भय से काँप रहे हैं, चिन्तित-से खड़े हैं और आतंक में मल-मूत्र त्याग रहे हैं। घोड़े अत्यन्त दीन हो गए हैं। जल का आश्रय लेने वाले गजराज पसीने से तर-बतर हैं। जब अधर्म युद्ध के लिए इकट्ठा होता है, तब पशु भी भय और विकार दिखाते हैं—मानो विपत्ति का पूर्वरूप।
व्यास उवाच