उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
कृत्तिकां पीडयंस्ती&णैर्नक्षत्रं पृथिवीपते । अभीक्षणवाता वायन्ते धूमकेतुमवस्थिता:,राजन! अपने तीक्ष्ण (क्रूरतापूर्ण) कर्मोंके द्वारा उपलक्षित होनेवाला राहु (चित्रा और स्वातीके बीचमें रहकर सर्वतोभद्रचक्रगतवेधके अनुसार) कृत्तिका नक्षत्रको पीड़ा दे रहा है। बारंबार धूमकेतुका आश्रय लेकर प्रचण्ड आँधी उठती रहती है
kṛttikāṃ pīḍayaṃstīvrakarmaṇāir nakṣatraṃ pṛthivīpate | abhīkṣṇavātā vāyante dhūmaketum avasthitāḥ ||
व्यास ने कहा—पृथिवीपते! राहु कृत्तिका नक्षत्र को पीड़ा दे रहा है। धूमकेतु के निमित्त से बार-बार प्रचण्ड आँधियाँ उठकर चलती रहती हैं।
व्यास उवाच