भीष्मपतनविषये धृतराष्ट्रस्य प्रश्नाः | Dhṛtarāṣṭra’s Questions on Bhīṣma’s Fall
निकारो निकृतिप्रज्जै: पाण्डवैस्त्वत्प्रतीक्षया | अनुभूत: सहामात्यै: क्षान्तश्न सुचिरं वने
nikāro nikṛtiprajñaiḥ pāṇḍavaistvatpratīkṣayā | anubhūtaḥ sahāmātyaiḥ kṣāntaś ca suciraṁ vane ||
पाण्डवों ने आपके द्वारा किये गये अपमान और कपट को भलीभाँति जानकर भी, केवल आपकी ओर आशा लगाकर—आपसे न्यायोचित व्यवहार की प्रतीक्षा करते हुए—अपने मन्त्रियों सहित दीर्घकाल तक वन में रहकर कष्ट भोगे और सब कुछ क्षमा-भाव से सहा।
संजय उवाच