Bhīṣma-nipāta-saṃvāda — Sañjaya’s Report of Bhīṣma’s Fall (भीष्मनिपातसंवादः)
अश्मसारमयं नून॑ हृदयं सुदृढं मम । यच्छुत्वा पुरुषव्याप्रं हतं भीष्म न दीर्यते,अवश्य ही मेरा यह हृदय लोहेके समान सुदृढ़ है, तभी तो पुरुषसिंह भीष्मको मारा गया सुनकर विदीर्ण नहीं होता है!
dhṛtarāṣṭra uvāca |
aśmasāramayaṃ nūna hṛdayaṃ sudṛḍhaṃ mama |
yac chrutvā puruṣavyāghraṃ hataṃ bhīṣmaṃ na dīryate ||
धृतराष्ट्र बोले—निश्चय ही मेरा हृदय पत्थर के सार का, लोहे-सा कठोर है; क्योंकि पुरुषव्याघ्र भीष्म के मारे जाने का समाचार सुनकर भी यह फट नहीं जाता।
धृतराष्ट उवाच