Adhyāya 111 (Book 6): Daśama-dina-saṃgrāma—Bhīṣma’s Counsel to Yudhiṣṭhira and the Śikhaṇḍin-Led Advance
धृतराष्ट्र रवाच पीड्यमानं बल दृष्ट््वा पार्थर्भीष्म: पराक्रमी । यदकार्षीद् रणे क्रुद्धस्तन्ममाचक्ष्व संजय
धृतराष्ट्र बोले—संजय! कुन्तीपुत्रों द्वारा अपनी सेना को पीड़ित होते देख, रण में क्रुद्ध हुए पराक्रमी भीष्म ने क्या किया? यह मुझे बताओ।
संजय उवाच