Previous Verse
Next Verse

Shloka 70

भीष्मपर्व — अध्याय ११०: पार्थभीमयोः प्रहारः तथा भीष्माभिमुखं संग्रामविस्तारः

Arjuna and Bhima’s pressure; escalation toward Bhishma

न कथउज्चन कौन्तेय मयि जीवति संयुगे । जयो भवति सर्वज्ञ सत्यमेतद्‌ ब्रवीमि ते

कौन्तेय! मेरे जीवित रहते संग्राम में तुम्हारी किसी प्रकार विजय नहीं हो सकती। सर्वज्ञ! मैं तुमसे यह सत्य कहता हूँ।

संजय उवाच