भीष्मपर्व — अध्याय ११०: पार्थभीमयोः प्रहारः तथा भीष्माभिमुखं संग्रामविस्तारः
Arjuna and Bhima’s pressure; escalation toward Bhishma
न कथउज्चन कौन्तेय मयि जीवति संयुगे । जयो भवति सर्वज्ञ सत्यमेतद् ब्रवीमि ते
कौन्तेय! मेरे जीवित रहते संग्राम में तुम्हारी किसी प्रकार विजय नहीं हो सकती। सर्वज्ञ! मैं तुमसे यह सत्य कहता हूँ।
संजय उवाच