भीष्मस्य शरवर्षः — Bhīṣma’s Arrow-Storm and Kṛṣṇa’s Impulse to Intervene
केकया भ्रातरश्रैव स्थिता युद्धाय दंशिता: । महाधनुर्धर अभिमन्यु, महाबली ट्रुपद, विशाल धनुष धारण करनेवाले युयुधान, पराक्रमी युधामन्यु और पाँचों भाई केकयराजकुमार--ये कवच धारण करके युद्धके लिये तैयार खड़े थे || १३ है ।।
केकय के पाँचों भाई (राजकुमार) भी कवच धारण किए युद्ध के लिए दंशित होकर खड़े थे। इस प्रकार उन्होंने भी उस अत्यन्त दुर्जय महाव्यूह के सामने प्रतिव्यूह रचा।
संजय उवाच