Nakula’s Declaration and the Uñchavṛtti Brāhmaṇa’s Superior Merit (Āśvamedhika Parva, Adhyāya 92)
जमदग्निर्वाच साक्षाद् दृष्टोड$सि मे क्रोध गच्छ त्वं विगतज्वर: । न त्वयापकृतं मेडद्य न च मे मन्युरस्ति वै
जमदग्नि बोले—“क्रोध! मैंने तुम्हें प्रत्यक्ष देख लिया है। अब तुम निश्चिन्त होकर चले जाओ। आज तुमने मेरा कोई अपकार नहीं किया; इसलिए तुम पर मेरा रोष नहीं है।”
वैशम्पायन उवाच