अश्वमेधावसानम् — Dakṣiṇā-vibhāga and Avabhṛtha
Completion of the Aśvamedha
एते चान्ये च बहव: सिद्धि परमिकां गता: । नृपाः सत्यैश्न दानैश्व न्यायलब्धैस्तपोधना:
वैशम्पायन बोले—हे तपोधन! ये और अन्य बहुत-से नरेश सत्य और न्याय से प्राप्त धन के दानों के द्वारा परम सिद्धि को प्राप्त हुए।
वैशम्पायन उवाच