Adhyāya 90: Babhruvāhana’s Reception and the Commencement of Yudhiṣṭhira’s Aśvamedha
दद्यादपश्च यः शक््त्या सर्वे तुल्यफला: स्मृता: । “श्रद्धापूर्वक दान देनेवाले मनुष्यमें यदि एक हजार देनेकी शक्ति हो तो वह सौका दान करे
श्रद्धापूर्वक दान देने वाला मनुष्य यदि एक हजार देने की शक्ति रखता हो तो सौ का दान करे; सौ देने की शक्तिवाला दस का दान करे; और जिसके पास कुछ न हो, वह भी अपनी शक्ति के अनुसार यदि केवल जल का दान कर दे—तो इन सबका फल समान माना गया है।
श्षशुर उवाच